क्या आपको भी लगता है की राइट ब्रदर्स ने ही किया था हवाई जहाज का आविष्कार? तो पहले इस पढ़े:

हवाई जहाज़ के आविष्कार को लेकर अभी भी पूरी जानकारी नहीं मिली है। हवाई जहाज़ का आविष्कार किसने किया था? यह सवाल बड़ा आसान लगता है। लेकिन असल में ये मामला सीधा नही है।

यह एक पुरानी विवाद की जड़ है, जो सौ वर्षों से जारी है।

कई अमेरिकियों का मानना है कि साइकिल मैकेनिक और स्व-शिक्षित इंजीनियर ऑरविल और विल्बर राइट हवाई उड़ानों के असली ‘जनक’ हैं, जिन्होंने 1903 में पहली बार निरंतर उड़ान भरी। वहीं, कई ब्राज़ीली यह तर्क करते हैं कि असली श्रेय अल्बर्टो सैंटोस ड्यूमोंट को मिलना चाहिए, जो एक कॉफी उत्पादक अमीर परिवार से थे और 1906 में पेरिस में पहली उड़ान भरी, जिसे इंटरनेशनल एरोनॉटिकल फ़ेडरेशन ने मान्यता दी थी। फिर कोन सही हो सकता है?

उस समय पेरिस एक ऐसा नगर बन गया था जहाँ विमान निर्माण की सर्वाधिक संभावनाएँ थीं। वहाँ उत्कृष्ट इंजीनियरिंग कॉलेज थे और धातु विज्ञान, मशीनरी, भौतिकी, और रसायन विज्ञान पर अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता आसानी से उपलब्ध थी। फ्रांस के इतिहासकार प्रोफेसर ज्यां-पियरे ब्ले का कहना है, “तब ऐसा प्रतीत होता था कि यह केवल समय की बात है।” उस युग में विमानन के उत्साही व्यक्तियों ने निर्धारित किया कि किसे पहली उड़ान के रूप में मान्यता दी जाएगी।


उन्होंने यह शर्त रखी कि उड़ान बिना किसी बाहरी सहायता (जैसे कैटापल्ट) के होनी चाहिए, और इसे लोग अपनी आंखों से देख सकें तथा रिकॉर्ड कर सकें। 12 नवंबर 1906 को सैंटोस ड्यूमोंट ने यह सब कर दिखाया। उन्होंने पेरिस में एक जनसमूह के समक्ष अपने विमान 14-बीआईएस से 220 मीटर की उड़ान भरी। अगले वर्ष, उन्होंने एक नया विमान डेमोएज़ेल बनाया, जो विश्व का पहला हल्का और बड़े पैमाने पर निर्मित विमान था।

सबूतों की बारी

1908 में राइट ब्रदर्स ने पहली बार दावा किया था की उन्होंने ही 5 साल पहले सबसे पहले उड़ान भरी थी।

ये सुन कर फ्रांस के लोग चौंक गए। अमेरिका और यूरोप के फ्लाइंग क्लबो में उस समय में चिट्ठियों में बातचीत चलती रहती थी। सभी लोग जानते थे की ज़मीन से लंबी दूरी तक उड़ने वाला पहला विमान बनाने की होड़ लगी है। लेकिन इस दौरान यूरॉप में राइट ब्रदर्स की कोई खबर सामने नही आई थी। उस समय राइट ब्रदर्स का कहना था की वे अपने पेटेंट का पास होने का इंतजार कर रहे थे और उन्हें इस बात का डर था की कोई उनकी तरकीब चुरा न ले।

ब्राज़ील के म्यूजियम ऑफ एस्ट्रोनॉमी के पूर्व डायरेक्टर हेनरिक लिंस डे बारोस जैसे कुछ वैज्ञानिक बताते हैं कि ऑरविल ने अपनी डायरी में लिखा था कि उस वक्त हवा की रफ़्तार क़रीब 40 किमी/घंटा थी. यानी इतनी हवा थी कि विमान बिना इंजन के भी अपने आप उड़ सकता था।

हालांकि राइट ब्रदर्स के समर्थक इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते. उनका कहना है कि पेरिस में 14-बीआईएस उड़ने से पहले ही, 1904-05 में राइट ब्रदर्स ने फ़्लायर के बेहतर मॉडल बना लिए थे।
राइट ब्रदर्स यूरोप गए और फ्रांस, इटली जैसे देशों में 200 से ज्यादा डेमो फ्लाइट्स कीं। एक उड़ान में तो उन्होंने 124 किलोमीटर तक का सफर भी तय कि
उसी वक्त फ्रांस के हवाई उड़ानों के शुरुआती जानकार फर्डिनेंड फर्बर जैसे लोगों ने भी मान लिया कि राइट ब्रदर्स ही पहले थे। उनका कहना था कि इतना बढ़िया कंट्रोल वाला विमान एक दिन में तो नहीं बन सकता।

जेन’स ऑल द वर्ल्ड्स एयरक्राफ्ट के 25 साल तक एडिटर रहे पॉल जैक्सन कहते हैं, “ऐसा नहीं हुआ कि किसी दिन कोई उठा, डिजाइन बनाई और बोला,’ये वो विमान है जो उड़ जाएगा!'”

वो कहते हैं, “ये तो दर्जनों, बल्कि सैकड़ों लोगों की मिलकर की गई मेहनत थी, तभी ये मुमकिन हुआ

कैटापल्ट की बहस

यूरोप में दिखाए गए राइट ब्रदर्स के फ्लायर विमान पहियों के बिना थे और उड़ने के लिए इन्हें कैटापल्ट (जिससे विमान को ज़ोर लगाकर उड़ने में मदद मिलती है) की मदद लेनी पड़ती थी. यही बात बड़ी बहस का मुद्दा बन गई।


लेकिन कहानी में मोड़ ये है कि सिर्फ़ सैंटोस ड्यूमोंट और राइट ब्रदर्स ही अकेले नहीं थे जिन्होंने खुद को हवाई यात्रा का आविष्कारक बताया. लेकिन कहानी में मोड़ ये है कि सिर्फ़ सैंटोस ड्यूमोंट और राइट ब्रदर्स ही अकेले नहीं थे जिन्होंने खुद को हवाई यात्रा का आविष्कारक बताया।


कहा जाता है कि जर्मनी के गुस्ताव वीसकुप्फ़, जो अमेरिका में रहते थे, उन्होंने तो 1901 में ही उड़ान भर ली थी। वहीं न्यूज़ीलैंड के रिचर्ड पियर्स ने भी मार्च 1903 में विमान उड़ाया था, ऐसा माना जाता है।
इसीलिए कई हवाई जहाज़ के जानकार मानते हैं कि ये बहस ही बेकार है कि आख़िर विमान किसने बनाया।

जेन’स ऑल द वर्ल्ड्स एयरक्राफ्ट के 25 साल तक एडिटर रहे पॉल जैक्सन कहते हैं, “ऐसा नहीं हुआ कि किसी दिन कोई उठा, डिजाइन बनाई और बोला,’ये वो विमान है जो उड़ जाएगा!'”

वो कहते हैं, “ये तो दर्जनों, बल्कि सैकड़ों लोगों की मिलकर की गई मेहनत थी, तभी ये मुमकिन हुआ।”

मान्यता की कहानी

जैक्सन मानते हैं कि सैंटोस ड्यूमोंट, वीसकुप्फ़ और कई दूसरे हवाई उड़ानों के शुरुआती लोगों को उतनी पहचान नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी।

वो कहते हैं, “आख़िर में तो उन्हीं लोगों के नाम बड़े होते हैं जिनके पास महंगे वकील होते हैं।”

वे कहते हैं, “दुख की बात ये है कि अगर आप 19वीं और 20वीं सदी के ज़्यादातर आविष्कारों को देखेंगे, तो उनका क्रेडिट अक्सर ग़लत लोगों को दे दिया गया।”

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