रथयात्रा क्यों मनाई जाती है:

जब भगवान जगन्नाथ खुद भक्तो के पास आए – यही है रथयात्रा का चमत्कार।

📝 स्पेशल रिपोर्ट | पुरी, ओडिसा के पुरी में रथयात्रा का भव्य आयोजन आज पूरे धूमधाम से संपन्न हुआ, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से निकलते हैं और पुरी की सड़कों पर भक्तों को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन हर बार इसकी भव्यता और भावनात्मक ऊर्जा लोगों को एक नई श्रद्धा से भर देती है।

क्यों मनाया जाता है रथयात्रा का त्यौहार :

पौराणिक कथाओं को अनुसार, एक बार देवी सुभद्रा को पूरी नगर को देखने की इच्छा जागृत हुई। तब भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र उन्हें पूरी की यात्रा करने के लिए रथ पर बिठा कर भ्रमण करने निकले। और रेट में उनकी मौसी गुंडीचा के मन्दिर में कुछ दिन रुके। तभी से यह हर साल इस घटना को याद करके जसन मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ इस दिन अपने भाई-बहन के साथ अपने ननिहाल (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं। यह यात्रा प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाती है कि भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने आते हैं। रथयात्रा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुकी है।

तीन विशेष रथ: एक आध्यात्मिक यात्रा, इस दिन तीन दिव्य रथ तैयार किए जाते हैं –

  • नंदीघोस रथ (भगवान जगन्नाथ का)
  • तालध्वज रथ (बलभद्र का)
  • दर्पदलन रथ (सुभद्रा का)

हर साल रथों का निर्माण परंपरागत कारीगरों द्वारा लकड़ी से किया जाता है। रथों की ऊंचाई 40 से 45 फीट तक होती है और इन्हें खींचना बेहद पुण्य का कार्य माना जाता है। इसलिए इस दिन को अधिक महत्व माना जाता है और लोगो की भीड़ से यह जग झूम उठता है।

भक्तो का महासंगम:

भक्तों का महासागर पुरी की सड़कों पर आज मानो आस्था की नदी बह रही थी। भारत के कोने-कोने से आए भक्तों ने भगवान के दर्शन के लिए घंटों इंतज़ार किया और जैसे ही रथ खींचने का समय आया, हजारों हाथ एक साथ उठे – कोई रथ को खींच रहा था, कोई ‘जय जगन्नाथ’ के नारे लगा रहा था, तो कोई हाथ जोड़कर भाव-विभोर हो रहा था।

इस दिन जगन्नाथ पुरी की प्रशासनिक व्यवस्था भी जबरदस्त।

इस विशाल आयोजन को सुचारु से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम करते है। दस हज़ार से अधिक सुरक्षाकर्मीयो को तैनात किया जाता है। ड्रोन से निगरानी की जाती है और लोगो की भीड़ को भी ध्यान में रखकर विशेष टीमों की ली जाती है।

पूरी नगर निगम की टीम की ओर से साफ सफाई व्यवस्था के लिए 24×7 कार्यबल सक्रिय रहा। मेडिकल कैम्प, जलपान केंद्र और शौचालय जैसी सुवहधह-जगह बनाई गईं।

🕊️ विदेशो तक जाती है जयकारों की गूंज:

पूरी के अलावा भी देश के कई अन्य केंद्रों में भी रथयात्रा की लहर उठती है। चारो तरफ से जयकारों की गूंज सुनाई पड़ती है। कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद से लेकर अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी भारतीय समुदाय ने रथयात्रा का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #RathYahtra2025 trend कर रहा है।

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