महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मुंबई सीरियल ब्लास्ट के सभी 12 अभियुक्तों को बरी करने के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।

राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 24 जुलाई को सुनवाई होगी, जिस पर मंगलवार को सहमति व्यक्त की गई। मुंबई सीरियल ब्लास्ट के 19 वर्ष बाद और ट्रायल कोर्ट के निर्णय के 10 वर्ष बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी 12 दोषियों को बरी किया था।
राज्य की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ से कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और तात्कालिक सुनवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने सूचित किया कि महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील दायर की है, जिसमें अभियुक्तों को दोषी ठहराने और पांच अभियुक्तों को मृत्यु दंड देने के निचली अदालत के निर्णय को पलटा गया था।
पीठ ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बरी किए गए 12 में से आठ व्यक्तियों को जेल से रिहा कर दिया गया है। मेहता ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हां, उन्हें रिहा कर दिया गया है। फिर भी, इस मामले पर तात्कालिक सुनवाई आवश्यक है।”
सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “बॉम्बे उच्च न्यायालय का निर्णय अत्यंत चौंकाने वाला है और हम इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।”
मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लास्ट में 189 व्यक्तियों की मृत्यु हुई।
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों की विभिन्न बोगियों में सात विस्फोट हुए। ये विस्फोट मुंबई की पश्चिमी रेलवे लाइन पर सात अलग-अलग ट्रेनों में हुए।
इन विस्फोटों में 189 व्यक्तियों की जान गई और 824 लोग घायल हुए। यह घटना मुंबई पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक मानी जाती है, जिसे सामान्यतः ‘7/11 ब्लास्ट’ कहा जाता है।
इस मामले में 2015 में एक विशेष अदालत ने पांच अभियुक्तों को फांसी और सात को जीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस निर्णय को पलटते हुए सभी 12 अभियुक्तों को बरी कर दिया। इनमें से एक अभियुक्त कमाल अंसारी की 2021 में मृत्यु हो गई थी।