महिलाओं के शरीर में अक्सर हो जाती है कैल्शियम की कमी,जाने इससे बचने के उपाय:

शरीर में कैल्शियम की संतुलित मात्रा स्वास्थ्य और हड्डियों की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी हड्डियों में दर्द और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। महिलाओं में कैल्शियम की कमी अक्सर देखी जाती है, जिसका कारण उनकी दिनचर्या और आहार हो सकता है।

बढ़ती उम्र और जीवनशैली में परिवर्तन के साथ महिलाओं में कैल्शियम की कमी का जोखिम अधिक होता है। इस लेख में हम विशेषज्ञों के साथ बातचीत के आधार पर कैल्शियम की कमी के शरीर पर प्रभावों का विश्लेषण करेंगे।

इस प्रकार के मामलों में समस्या सामान्यतः बचपन से उत्पन्न होती है। बच्चों में हाथ, पैर या हड्डियों में दर्द इसकी एक अभिव्यक्ति है।

बचपन से ही शुरू हो जाती है इसकी कमी:

बेंगलुरु की चिकित्सक आत्रेय निहारचंद्रा न्यूट्रिशन के क्षेत्र में लगभग दो दशकों से कार्यरत हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में बच्चों और अन्य व्यक्तियों को पर्याप्त धूप नहीं मिलती, जिससे उनमें कैल्शियम की कमी देखी जाती है। धूप के माध्यम से हमारे शरीर को विटामिन-डी प्राप्त होता है, जो कैल्शियम के अवशोषण में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, यह हड्डियों को सुदृढ़ बनाए रखता है।

उनका कहना है, “वर्तमान में खेलने या शारीरिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त स्थानों की अनुपलब्धता है, जिससे बच्चे सामान्यतः इनडोर खेलों तक सीमित रह जाते हैं। इससे शारीरिक गतिविधियों में कमी आती है, जिससे हड्डियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।” गांवों में लोग अधिक शारीरिक श्रम करते हैं और उन्हें पर्याप्त धूप मिलती है, फिर भी उनके आहार में कैल्शियम की कमी हो सकती है।

शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने का एक उपाय संतुलित आहार हो सकता है। हालांकि, जिन व्यक्तियों में कैल्शियम की कमी होती है, उनका आहार भी इसे पूरा करने में असफल रहता है।

ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि जब तक शरीर में कैल्शियम अवशोषित नहीं होगा तब तक आपके व्यायाम करने या धूप में चले जाने से भी कोई फ़ायदा नहीं होता है.”

सामान्यतः, हम अपने आवासों में या आस-पास कई ऐसे मामलों का अवलोकन करते हैं, जिनमें महिलाओं को कैल्शियम की कमी के कारण चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है। महिलाओं में कमर दर्द, घुटनों का दर्द, और हड्डियों की कमजोरी अब एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या बन गई है।

महिलाएं रखे अपना ध्यान:

ऑनलाइन वेलनेस प्लेटफ़ॉर्म ‘मेटामॉरफोसिस’ की संस्थापक और पोषण विशेषज्ञ दिब्या प्रकाश ने दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं में कैल्शियम की कमी पर विशेष अध्ययन किया है।

उनका तर्क है कि बचपन में लड़कियों का शारीरिक विकास लड़कों की तुलना में अधिक तीव्र होता है, जिससे उन्हें अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है। 19 वर्ष की आयु के बाद, लड़कों का विकास अधिक तीव्र होता है, लेकिन लड़कियों को मासिक धर्म और अन्य कारणों से भी अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है।

बताते हैं कि भारत में सामान्यतः घरों में महिलाएं पनीर, दाल, सोयाबीन और मांसाहारी भोजन को पुरुषों को बेहतर ढंग से परोसती हैं, जबकि स्वयं ग्रेवी के साथ भोजन करती हैं।

कई माता-पिता विज्ञापनों के प्रभाव में आकर बच्चों को दूध में मिलाकर स्वास्थ्य पूरक देते हैं, किंतु विशेषज्ञों के अनुसार, इससे कैल्शियम की तुलना में बच्चों के शरीर में अधिक चीनी पहुंचती है, जिससे बच्चे शुगर के आदी हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें सामान्य दूध या बिना चीनी वाले किसी भी चीज़ का स्वाद पसंद नहीं आता।

शरीर में कैल्शियम की कमी को रोकने के लिए अंजीर, ब्रोकली, सहजन, रागी, सूखे मेवे और नट्स अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।

प्रेगनेंसी से लेकर ओल्ड एज तक रखे अपना ख्याल:

प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण को तेज़ी से कैल्शियम और आयरन की ज़रूरत होती है, जो वह अपनी मां से पूरी करता है. इसलिए इस दौरान महिलाओं को कैल्शियम की काफ़ी ज़रूरत होती है।

अतः चिकित्सक सामान्यतः गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की गोलियाँ सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि इनकी शारीरिक कमी न हो।

सामान्यतः एक वयस्क को प्रति किलोग्राम वजन के लिए 800 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है, जबकि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को 1200 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। हालांकि, कैल्शियम और आयरन की गोलियों का सेवन करते समय सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है।

दिब्या प्रकाश कहती हैं, “हमारे शरीर में कैल्शियम और आयरन छोटी आंत के विशेष भाग में अवशोषित होते हैं। इसलिए इन दोनों दवाओं का सेवन अलग-अलग समय पर करना चाहिए। यदि आप सुबह कैल्शियम लेते हैं, तो आयरन रात में लेना बेहतर होता है। इसके अलावा, कैल्शियम की गोली खाली पेट नहीं, बल्कि भोजन के बीच में लेनी चाहिए।”

शरीर में कैल्शियम की कमी से बचने के लिए आवश्यक है कि आप प्रारंभ से ही इसकी उचित मात्रा बनाए रखें, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम अवशोषित करने की क्षमता घटती जाती है।

दवा की जरूरत कितनी:

कैल्शियम की कमी से न केवल हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं, बल्कि इसकी वजह से दिल से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। कैल्शियम फ़ैट सॉल्युबल यानी वसा में घुलकर हज़म होने वाला पदार्थ है और महिलाओं की शारीरिक बनावट की वजह से एक महिला के शरीर में औसतन एक पुरुष के शरीर से ज़्यादा फ़ैट होता है।

दिब्या प्रकाश के मुताबिक़ इसलिए भी महिलाओं को ज़्यादा कैल्शियम की ज़रूरत होती है। लेकिन कम ख़ुराक और अन्य वजहों से वे पुरुषों से कम कैल्शियम लेती हैं।”

हमारे शरीर में कैल्शियम सही तरीके़ से अब्ज़ॉर्ब हो इसके लिए ज़रूरी है कि हमारा मेटाबॉलिज़्म सही हो। तेज़ चलने (एक्सरसाइज़), समय पर सोने (कम से कम 7-8 घंटे) और उठने से मेटाबॉलिज़्म को ठीक रखा जा सकता है। भले ही कैल्शियम की दवा आसानी से उपलब्ध हो, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के कैल्शियम की गोली या दवा लेना सुरक्षित नहीं है।

डॉक्टर आत्रेय निहारचंद्रा कहती हैं, “शरीर को कैल्शियम की कितनी ज़रूरत है, यह डॉक्टर अपनी जांच के बाद तय करते हैं और उसी के मुताबिक़ दवा या गोली लेने की सलाह देते हैं।ज़रूरत से ज़्यादा कोई भी चीज़ लेना जोखिम भरा हो सकता है और यह कैल्शियम के साथ भी लागू है।”
ज़रूरत से ज़्यादा कैल्शियम किडनी में स्टोन से लेकर कई गंभीर परेशानियों को जन्म दे सकता है।

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