जगदीश धनखड़ के इस्तीफे पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल, क्या बोले???

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक का उल्लेख किया।

उन्होंने लिखा, “कल दोपहर 12:30 बजे जगदीप धनखड़ की अध्यक्षता में राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमिटी (बीएसी) की बैठक हुई, जिसमें सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित अधिकांश सदस्य उपस्थित थे। कुछ चर्चा के बाद, कमिटी ने शाम 4:30 बजे पुनः बैठक करने का निर्णय लिया।” जयराम रमेश ने कहा कि शाम को हुई पुनः बैठक में नड्डा और रिजिजू उपस्थित नहीं थे, और इस बारे में धनखड़ को जानकारी भी नही दी गई थी।

जयराम रमेश ने लिखा, “यह स्पष्ट है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच कुछ गंभीर घटनाक्रम घटित हुआ, जिसके कारण जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में भाग नहीं लिया।”

जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि धनखड़ ने अपने इस्तीफे का कारण अपनी सेहत बताया है, जिसे मान लेना उचित है, लेकिन वास्तविकता यह है कि उनके इस्तीफे के पीछे और भी गहरे कारण विद्यमान हैं। उन्होंने पोस्ट किया, “जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ प्रकट करता है। साथ ही, यह उन व्यक्तियों की नीयत पर गंभीर प्रश्न उठाता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुँचाया।”

जगदीश धनखड़ का इस्तीफा क्यों? स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

राष्ट्रपति मुर्मू को संबोधित अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा कि वह स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहे हैं।

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों और चिकित्सा सलाह का उल्लेख करते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित पत्र में लिखा, ‘स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं।’

उन्होंने राष्ट्रपति को सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया, साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को भी उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।


जगदीप धनखड़ ने अपने त्यागपत्र में लिखा, ‘मुझे संसद के सभी माननीय सदस्यों से जो स्नेह, विश्वास और सम्मान मिला, वह जीवनभर उनके हृदय में संचित रहेगा.’ उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में मिले अनुभव और दृष्टिकोणों के लिए मैं गहराई से आभारी हूं।

भारत के आर्थिक विकास और अभूतपूर्व परिवर्तनकारी दौर का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य और संतोष का विषय रहा है।’ उन्होंने भारत के वैश्विक उदय और उज्ज्वल भविष्य पर अटूट विश्वास जताते हुए अपना त्यागपत्र समाप्त किया।

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