
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मंगलवार को बादल फटने की घटना हुई है। हर्षिल क्षेत्र में खीर गंगा गदेरे का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे धराली गांव में गंभीर नुकसान हुआ है।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मीडिया को बताया कि अब तक की जानकारी के अनुसार चार लोगों की मृत्यु हुई है और कुछ संपत्तियों के नुकसान की सूचना प्राप्त हुई है।
डीआईजी एनडीआरएफ मोहसेन शाहेदी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, “घटना में 40 से 50 घर बह गए हैं और 50 से अधिक लोग लापता हैं।” इस बीच, धराली के स्थानीय निवासियों का दावा है कि तबाही का स्तर अत्यधिक है और इससे जान-माल का व्यापक नुकसान हुआ है।
धराली गांव के आस-पास क्या स्थित था? आस्था ने दी जानकारी
जहां यह घटना हुई, आस्था वहीं की निवासी हैं। वह कहती हैं, “वहां विशाल होटल थे, तीन-चार मंजिल के। अब उनकी छतें भी दिखाई नहीं दे रही हैं। इतना भयंकर नुकसान हुआ है कि पूरा बाजार समाप्त हो गया है। धराली का एक बड़ा बाजार था। एक विशाल मंदिर भी था। अब वहां कुछ भी नहीं है। सब कुछ नष्ट हो गया। कल्प केदार मंदिर भी अदृश्य है।”

धराली गंगोत्री के मार्ग पर स्थित है और यह हर्षिल वैली के निकट है। कल्प केदार यहां का स्थानीय मंदिर है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। चारधाम यात्रा का मार्ग धराली से होकर गुजरता है।
इस प्रकार, श्रद्धालु कई बार धराली के होटलों में ठहरते हैं। हर्षिल वैली के बगोरी गांव के निवासी करण ने बताया कि वैली के आस-पास के क्षेत्रों को खाली कराया गया है। लोगों को निकटवर्ती ऊंचे स्थानों पर भेजा जा रहा है, ताकि रात में बारिश होने पर जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने संवेदना व्यक्त की।

उत्तराखंड में आई इस गंभीर प्राकृतिक आपदा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक प्रकट किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “उत्तरकाशी के धराली में हुई इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति मेरी संवेदना है।मैं सभी पीड़ितों की कुशलता की कामना करता हूं। मैंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी से बात कर स्थिति की जानकारी ली है। राज्य सरकार की निगरानी में राहत और बचाव की टीमें हरसंभव प्रयास में जुटी हैं। लोगों तक सहायता पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।”
इससे पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि आईटीबीपी की तीन टीमों को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है। इसके साथ ही एनडीआरएफ़ की चार टीमें भी घटनास्थल के लिए रवाना की गई हैं।
बादल फटना क्या है?
मौसम विभाग के अनुसार, यदि एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे अधिक वर्षा एक सीमित क्षेत्र (एक से दस किलोमीटर) में होती है, तो इसे बादल फटना कहा जाता है। कभी-कभी एक ही स्थान पर एक से अधिक बादल फट सकते हैं, जिससे अधिक जान-माल का नुकसान होता है, जैसा कि उत्तराखंड में 2013 में हुआ था।
हालांकि, हर भारी वर्षा की घटना को बादल फटना नहीं माना जाता। यह महत्वपूर्ण है कि केवल एक घंटे में 10 सेंटीमीटर वर्षा से अधिक नुकसान नहीं होता, लेकिन यदि आसपास कोई नदी या झील है और उसमें अचानक जल स्तर बढ़ जाता है, तो आस-पास के आवासीय क्षेत्रों में अधिक क्षति होती है।